Monitor क्या है I Types of Monitor in Hindi 2021 I यह कितने प्रकार के होते है

Monitor क्या है और यह कितने प्रकार के होते है


Monitor एक आउटपुट डिवाइस होती है. Output Device हार्डवेयर का एक कॉम्पोनेन्ट या कंप्यूटर का मुख्य भाग है. जिसे छुआ जा सकता है और जिसे कंप्यूटर यूजर के समक्ष सूचना प्रस्तुत करने के लिए प्रयोग किया जाता है. इसके बिना कंप्यूटर अधूरा होता है. मॉनिटर को विज़ुअल डिस्प्ले यूनिट (Visual Display Unit) भी कहते है.

यह देखने में TV की तरह होता है. यह आउटपुट डाटा को अपनी स्क्रीन पर Soft Copy के रूप में दिखाता है. Monitor सूचना के किसी भी प्रकार ध्वनी (Sound), डाटा, मेमोरी, आकृतियाँ और अन्य को प्रदर्शित कर सकता है.

Monitor Kya Hai in Hindi and Types
Monitor Kya Hai in Hindi and Types

Monitor एक ऐसा आउटपुट डिवाइस है जो टीवी जैसे स्क्रीन पर आउटपुट को प्रदर्शित करता है. मॉनिटर को उनके द्धारा प्रदर्शित रंगों के आधार पर 3 भागो में बांटा गया है.

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Monochrome Monitor (मोनोक्रोम मॉनिटर)


Monochrome शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है जिसमे पहला मोनो (Mono) यानि एकल (Single) और क्रोम (Chrome) यानि रंग (Color) इन दोनों से मिलाकर बना है.इस प्रकार के मॉनिटर स्क्रीन पर आउटपुट को Black and White रूप में प्रदर्शित करते है.

Types of Monitor Monochrome Monitor
Types of Monitor Monochrome Monitor

Grayscale Monitor (ग्रे-स्केल मॉनिटर)


Grayscale मॉनिटर विशेष प्रकार के मोनोक्रोम मॉनिटर होते है जो विभिन्न ग्रे शेड्स (Gray Shades) में ऑउटपुर प्रदर्शित करते है. इस प्रकार के मॉनिटर आउटपुट अधिकतर हैन्डी कंप्यूटर जैसे लैपटॉप में प्रयोग किये जाते है.

Types of Monitor Grayscale Monitor
Types of Monitor Grayscale Monitor

Color Monitors (रंगीन मॉनिटर)


रंगीन कलर मॉनिटर RGB (Red-Green-Blue) विकिरणों के समायोजन (Adjustment) के रूप में आउटपुट को प्रदर्शित करता है. RGB सिद्धान्त के कारण ऐसे मॉनिटर उच्च रेसोलुशन (Resolution) में ग्राफ़िक्स को प्रदर्शित करने में सक्षम होते है. कंप्यूटर मेमोरी की क्षमता के अनुसार ऐसे मॉनिटर 16 से 16 लाख तक के रंगों में आउटपुट प्रदर्शित करने की क्षमता रखते है.

Types of Monitor Color Monitor
Types of Monitor Color Monitor

Types of Monitor in Hindi (मॉनिटर के प्रकार)


मॉनिटर अपने आकर प्रकार और कार्य क्षमता के अनुसार बहोत प्रकार के होते है. मॉनिटर के प्रकार कुछ इस तरह से है.

  1. CRT (Cathode Ray Tube) Monitor
  2. Flat Panel Monitor
  3. LCD (Liquid Crystal Display) Monitor
  4. LED (Light Emitting Diode) Monitor

CRT Monitor (सी.आर.टी. मॉनिटर)


अधिकतर मॉनीटरों में पिक्चर ट्यूब एलेमेन्ट (Picture Tube Element) होता है जो टीवी सेट के सामान होता है. यह ट्यूब CRT (Cathode Ray Tube) कहलाती है. CRT तकनीक सस्ती और उत्तम रंगीन आउटपुट देने में सक्षम होती है. जिसको VDU (Visual Display Unit) भी कहा जाता है.

CRT तकनीक रास्टर ग्राफिक्स (Raster Graphics) के सिद्धान्त पर कार्य करती है. पिक्चर ट्यूब (Picture Tube) में से हवा को निकाल कर खली कर दिया जाता है. मॉनिटर में इसकी समतल सतह की और इलेक्ट्रॉन की पतली पुंज (Beam) छोड़ी जाती है.

समतल सतह के आंतरिक पृष्ठ (Face) पर फास्फोरस का लेपन (Coating) होता है जो उच्च गति के इलेक्ट्रॉन के टकराव से प्रकाश उत्सर्जित करता है. प्रत्येक पिक्सेल (Pixel) इलेक्ट्रान के एक पुंज (Beam) से चमकता है.

Types of Monitor CRT Monitor
Types of Monitor CRT Monitor

Flat Panel Monitor (फ्लैट पैनल मॉनिटर)


Flat Panel Monitor मॉनिटर और डिस्प्ले डिवाइसेज की तकनीक को CRT तकनीक के स्थान पर विकसित किया गया है. जिसमे रसायनों और गैसों को काँच की प्लेटों के मध्य संयुक्त किया जाता है. यह पतली डिस्प्ले डिवाइसेज फ्लैट पैनल डिस्प्ले (Flat Panel Display) कहलाती है.

ये डिवाइसेज वजन में हलकी और विधुत (Light) की कम खपत करने वाली होती है. ये डिवाइस लैप टॉप (Laptop) और LCD कम्प्यूटर्स में लगाई जाती है. फ्लैट पैनल डिस्प्ले में द्रवीय क्रिस्टल डिस्प्ले (Liquid Crystal Display - LCD) तकनीक होती है. LCD में CRT तकनीक की तुलना में रेसोलुशन (Resolution) कम होता है. जिससे ऑउटपुर स्पष्ट नहीं आता है.


दो अन्य फ्लैट पैनल तकनीकों के नाम है - पहली गैस प्लाज्मा डिस्प्ले (Gas Plasma Display-GPD) और दूसरी एलेक्ट्रॉलुमिनेसेन्ट डिस्प्ले (Electroluminescent Display-EL) है. GPD और EL तकनीक में LCD  की तुलना में अच्छा रेसोलुशन होता है लेकिन अभी यह तकनीक बहोत महँगी है.

Types of Monitor Flat Panel Monitor
Types of Monitor Flat Panel Monitor

LCD (Liquid Crystal Display) Monitor (एल.सी.डी. मॉनिटर)


CRT मॉनिटर बिलकुल TV टेलीविज़न की तरह के होते थे जैसे-जैसे समय निकलता गया Technology का भी विकास हुआ और CRT मॉनिटर की जगह LCD (Liquid Crystal Display) Monitor का प्रचलन हुआ या इस्तेमाल होने लगा.

इनका सबसे पहले लैपटॉप की स्क्रीन में इस्तेमाल होता था फिर उसके बाद इसका उपयोग डेस्कटॉप कंप्यूटर के मॉनिटर में भी होने लगा ये देखने में बहोत आकर्षक लगते है. यह एक Digital Technology है जो तरल क्रिस्टल के माध्यम से फ्लैट सतह पर आकृति बनाता है.

इन मॉनीटर्स को रखने में कम जगह का इस्तेमाल होता है. कम बिजली खर्च करता है और पुराने CRT मॉनिटर की तुलना में बहोत कम गर्मी पैदा होती है. वर्तमान में LCD Monitor ज्यादा प्रचलन में है.

Types of Monitor LCD Monitor
Types of Monitor LCD Monitor

LED (Light Emitting Diode) Monitor (एल.ई.डी. मॉनिटर)


LED मॉनिटर वर्तमान में अभी बाजार में मॉनिटर के नवीनतम प्रकार है. ये फ्लैट पैनल डिस्प्ले या थोड़ा घुमावदार डिस्प्ले के होते है. CRT और LCD की तुलना में LED Monitor बहोत कम बिजली का उपयोग करते है और इनको पर्यावरण के अनुकूल भी माना जाता है.

इस मॉनिटर का फायदा ये है कि ये ज्यादा Contrast वाले पिक्चर्स का उत्पादन करते है और ये पर्यावरण पर कम नकरात्मक प्रभाव डालते है. LED मॉनिटर CRT और LCD मॉनिटर से ज्यादा टिकाऊ और चलने वाले होते है. इसकी डिस्प्ले बहोत पतली डिज़ाइन होती है. इसमें ज्यादा गर्मी पैदा नहीं होती है.

LED मॉनिटर बहोत महंगे होते है और अभी जो घुमावदार डिस्प्ले वाले मॉनिटर बाजार में उपलब्ध है वह बहोत महंगे होते है. इसमें बैक लाइटिंग के लिए कोल्ड कैथोड फ्लोरोसेंट लैंप (Cold Cathode Fluorescent Lamp-CCFL) की बजाय लाइट एमिटिंग डायोड (Light Emitting Diode-LED) का इस्तेमाल किया जाता है.

Types of Monitor LED Monitor
Types of Monitor LED Monitor


Main Characteristics of a Monitor (मॉनिटर के मुख्य लक्षण)


एक मॉनिटर के लक्षणों में से कुछ मुख्य लक्षण निम्न प्रकार से है -

  1. Resolution (रेसोलुशन)
  2. Refresh Rate (रिफ्रेश दर)
  3. Dot Pitch (डॉट पिच)
  4. Interlaced or Non-Interlaced (इंटरलेस्ड या नॉन-इंटरलेस्ड)
  5. Bit Mapping (बिट मैपिंग)

Resolution (रेसोलुशन)


मॉनिटर डिस्प्ले डिवाइस का एक महत्वपूर्ण गुण है Resolution कहे या Sharpness होता है. अधिकतर डिस्प्ले डिवाइसो में स्क्रीन पर चित्र छोटे-छोटे डॉट्स के चमकने से बनते है. स्क्रीन पर दिखने वाले ये छोटे-छोटे Dots को पिक्सेल्स (Pixels) कहलाते है. पिक्चर एलिमेंट के सम्पूर्ण रूप को पिक्सेल है. मॉनिटर स्क्रीन जितने अधिक पिक्सेल्स होंगे उतना अच्छा रेसोलुशन (Resolution) होगा यानि स्क्रीन पर चित्र उतना अधिक स्पष्ट होगा.

टेक्स्ट पर अक्षर या कैरक्टर स्क्रीन पर डॉट मैट्रिक्स (Dot Matrix) कॉनफ्रीगुरेशन से बने है. सामान्यतया मैट्रिक्स का आकार 5x7=35 पिक्सेल या 7x12=84 पिक्सेल के रूप में टेक्स्ट डिस्प्ले करने के लिए होता है. इस प्रकार एक स्क्रीन पर 65 कैरेक्टर की 25 लाइन्स डिस्प्ले की जा सकती है.स्क्रीन पर इससे अधिक भी रेसोलुशन (Resolution) प्राप्त किया जा सकता है.

Refresh Rate (रिफ्रेश दर)


दोस्तों, कंप्यूटर मॉनिटर लगातार कार्य करता रहता है. इसका अनुभव हम साधारण तरीके से आँखों से नहीं कर पाते है. कंप्यूटर स्क्रीन पर इमेज बायें  से दायें तथा ऊपर से निचे इलेक्ट्रान गन के द्धारा परिवर्तित होती रहती है और इसका अनुभव हम तब ही कर पाते है जब स्क्रीन 'क्लिक' करती है.

स्क्रीन के रिफ्रेश होने का अनुभव हम तब कर पाते है जब स्क्रीन तेजी से परिवर्तित नहीं होती है. मॉनिटर की रिफ्रेश दर (Refresh Rate) को हर्ट्ज़ में नापा जाता है.

Dot Pitch (डॉट पिच)


डॉट पिच एक प्रकार की मापने की तकनीक है जो यह दिखाती है की प्रत्येक Pixel के बिच में Horizontal दूरी या अन्तर कितना है. डॉट पिच (Dot Pitch) का मापन मिलीमीटर में करते है. यह एक ऐसा गुण या विशेषता है जो मॉनिटर की गुणवत्ता को स्पष्ट करता है या प्रदर्शित करता है.

एक कलर मॉनिटर जो पर्सनल कंप्यूटर में प्रयुक्त होता है उसकी डॉट पिच की रेंज 0.15 mm से 0.30 mm तक होती है. Dot Pitch को फॉस्फर पिच (Phosphor Pitch) भी कहते है.

Interlaced or Non-Interlaced (इंटरलेस्ड या नॉन-इंटरलेस्ड)


इंटरलेसिंग () एक ऐसी तकनीक है जो कि एक मॉनिटर को इस योग्य बनाती है कि वह डिस्प्ले होने वाले रेसोलुशन (Resolution) की गुणवत्ता में और अधिक वृद्धि कर सके. इंटरलेसिंग वही Resolution प्रदान करता है जो नॉन-इंटरलेसिंग प्रदान करता है.

लेकिन यह कम खर्चीला होता है बस इंटरलेसिंग की यह कमी होती है कि इसका Response Time धीमा होता है. जिससे की वह प्रोग्राम जो तेज रिफ्रेश रेट की मांग करते है जैसे (एनीमेशन और वीडियो) की फ़्लिकेरिंग (Flickering) को कम करना पड़ता है.

इन दोनों प्रकार के मॉनीटरों में देखा जाये तो दोनों ही एक सामान Resolution प्रदान करते है परन्तु नॉन-इंटेरलेंसिंग मॉनिटर ज्यादा अच्छा होता है.

Bit Mapping (बिट मैपिंग)


प्रारम्भ में डिस्प्ले डिवाइसेस केवल कैरक्टर एड्रेसेबल (Character Addressable) होती थी. जो केवल कैरक्टर (Text) को ही डिस्प्ले करती थी. स्क्रीन पर भेजा जाने वाला प्रत्येक कैरक्टर समान आकार और एक निश्चित संख्या के पिक्सेलो (Pixels) के समूह (Block) का होता था. ग्राफ़िक्स डिस्प्ले डिवाइस की माँग बढ़ने पर मॉनिटर निर्माताओं ने बहुउपयोगी डिस्प्ले डिवाइसेजम विकसित की जिसमे टेक्स्ट और ग्राफ़िक्स दोनों डिस्प्ले हो सकें.

ग्राफ़िक्स आउटपुट डिस्प्ले करने के लिए जो तकनीक काम में लायी जाती है वह बिट मैपिंग (Bit Mapping) कहलाती है. इस तकनीक में बिट मैप ग्राफ़िक्स का प्रत्येक पिक्सेल ऑपरेटर द्धारा स्क्रीन पर नियन्त्रित होता है. इससे ऑपरेटर किसी भी आकृति की ग्राफ़िक्स स्क्रीन पर बना सकता है.

Video Standard or Display Modes (विडियो मानक या डिस्प्ले पद्धति)


पर्सनल कंप्यूटर की वीडियो तकनीक में रोज नये सुधार आते जा रहे है. वीडियो स्टैण्डर्ड के कुछ उदाहरण निम्न प्रकार है-

  1. Colour Graphics Adapter (कलर ग्राफ़िक्स अडैप्टर)
  2. Enhanced Graphics Adapter (इन्हैंस्ड ग्राफ़िक्स अडैप्टर)
  3. Video Graphics Array (विडियो ग्राफ़िक्स ऐरे)
  4. Extended Graphics Array (एक्सटेण्डेड ग्राफ़िक्स ऐरे)
  5. Super Video Graphics Array (सुपर विडियो ग्राफ़िक्स ऐरे)

आज हमने क्या जाना - दोस्तों आज हमने अपने इस लेख में मॉनिटर के बारे में आपको बताया है. जिसमे हमने हिंदी में बताया है की Monitor क्या है, मॉनिटर कितने प्रकार के होते है Types of Monitor in Hindi 2021 के बारे में, मेरी और आगे आने वाली पोस्टो को पढ़ने और इसकी नोटिफिकेशन के लिए वेबसाइट की Notification Allow जरूर कर ले. पोस्ट को अंत तक पढ़ने के लिए .. धन्यवाद

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